चीन ने अमेरिकी विमान के कलपुर्जे से तकनीक की नकल कर बम बरसाने वाला विमान के मॉडल का विकास किया है। ब्रिटिश अख़बार डेली मेल में छपी खबर में कहा गया है कि चीन ने अमेरिका के एफ-117 नाइटहॉक विमान से अपने जे-20 विमान के कलपुर्जे हासिल कर उनकी तकनीक चुराई है। अमेरिका के इस विमान को सर्बिया में कोसोवो युद्ध के दौरान1999 में मार गिराया गया था।
गौरतलब है कि जे-20 विमान रडार की पकड़ से दूर रहता है। दुनिया में अभी सिर्फ अमेरिका के पास ऐसे विमान हैं। इस महीने की शुरुआत में चीन ने जे-20 नाम के विमान के मॉडल की तस्वीरें जारी की थीं। चीन के अधिकारियों का कहना था कि २०१६ तक चीन ऐसे विमान पूरी तरह से विकसित कर लेगा।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल में छपी खबर में कोसोवो युद्ध के दौरान क्रोएशिया के सैन्य प्रमुख रहे एडमिरल डावोर डोमाजेट-लोसो कहा, ' उस वक्त हमारी खुफिया रिपोर्ट में बताया गया था कि चीन के एजेंट उस इलाके में घूम रहे थे जहां एफ-117 विमान गिरा था। उन एजेंटों ने स्थानीय किसानों से विमान के कलपुर्जे खरीद लिए थे। मैं मानता हूं कि चीन ने उन मैटीरियल का इस्तेमाल स्टील्थ विमान की तकनीक समझने और फिर उसके आधार पर विमान तैयार करने में की होगी।' सर्बिया के कई सैन्य अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी विमान के कुछ हिस्से विदेशी सेनाओं के हाथ लग गए थे।
इस महीने की शुरुआत में यह खबर आई थी कि चीन ने रडार की पकड़ से बचकर निकलने वाले लड़ाकू विमान का नमूना तैयार कर लिया है। मौजूदा समय में ऐसा विमान सिर्फ अमेरिका के पास है। जानकारों का मानना है कि इस नमूने के आधार पर विमान तैयार होने में अभी कुछ और साल लगेंगे।
जे-20 नाम का यह चीनी विमान अमेरिका के एफ-22 विमान से होड़ लेगा। इंटरनेशनल असेसमेंट एंड स्ट्रेटजी सेंटर में चीनी सेना के के विशेषज्ञ रिक फिशर का कहना है कि इस दशक के आखिर तक यह विमान अमेरिकी एफ-22 से टक्कर ले सकेगा। जापान के अख़बार असाही शिंबून ने चीन के सैन्य सूत्रों के हवाले से छापा है कि चीन ने जे-20 विमानों की परीक्षण उड़ानें इसी महीने शुरू करने का ऐलान किया है। लेकिन युद्ध के लिए इन विमानों को तैयार करने में 2017 तक का समय लग सकता है।
गौरतलब है कि जे-20 विमान रडार की पकड़ से दूर रहता है। दुनिया में अभी सिर्फ अमेरिका के पास ऐसे विमान हैं। इस महीने की शुरुआत में चीन ने जे-20 नाम के विमान के मॉडल की तस्वीरें जारी की थीं। चीन के अधिकारियों का कहना था कि २०१६ तक चीन ऐसे विमान पूरी तरह से विकसित कर लेगा।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल में छपी खबर में कोसोवो युद्ध के दौरान क्रोएशिया के सैन्य प्रमुख रहे एडमिरल डावोर डोमाजेट-लोसो कहा, ' उस वक्त हमारी खुफिया रिपोर्ट में बताया गया था कि चीन के एजेंट उस इलाके में घूम रहे थे जहां एफ-117 विमान गिरा था। उन एजेंटों ने स्थानीय किसानों से विमान के कलपुर्जे खरीद लिए थे। मैं मानता हूं कि चीन ने उन मैटीरियल का इस्तेमाल स्टील्थ विमान की तकनीक समझने और फिर उसके आधार पर विमान तैयार करने में की होगी।' सर्बिया के कई सैन्य अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी विमान के कुछ हिस्से विदेशी सेनाओं के हाथ लग गए थे।
इस महीने की शुरुआत में यह खबर आई थी कि चीन ने रडार की पकड़ से बचकर निकलने वाले लड़ाकू विमान का नमूना तैयार कर लिया है। मौजूदा समय में ऐसा विमान सिर्फ अमेरिका के पास है। जानकारों का मानना है कि इस नमूने के आधार पर विमान तैयार होने में अभी कुछ और साल लगेंगे।
जे-20 नाम का यह चीनी विमान अमेरिका के एफ-22 विमान से होड़ लेगा। इंटरनेशनल असेसमेंट एंड स्ट्रेटजी सेंटर में चीनी सेना के के विशेषज्ञ रिक फिशर का कहना है कि इस दशक के आखिर तक यह विमान अमेरिकी एफ-22 से टक्कर ले सकेगा। जापान के अख़बार असाही शिंबून ने चीन के सैन्य सूत्रों के हवाले से छापा है कि चीन ने जे-20 विमानों की परीक्षण उड़ानें इसी महीने शुरू करने का ऐलान किया है। लेकिन युद्ध के लिए इन विमानों को तैयार करने में 2017 तक का समय लग सकता है।
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