Sunday, January 23, 2011

3G Spectrum News


स्पेक्ट्रम आवंटन में गड़बड़ी के आरोपों के साए में चल रहे टेलीकॉम सेक्टर से उपभोक्ताओं को एक अच्छी खबर मिली है। इससे उम्मीद जगी है कि मोबाइल फोन की सेवाप्रदाता कंपनियों की मनमानी अब नहीं चलेगी। अगर उन्होंने अपने वादे और उपभोक्ताओं की मांग के मुताबिक सेवा नहीं दी तो उपभोक्ता बिना अपना नंबर बदले किसी दूसरी कंपनी की सेवा ले सकते हैं।

इसके लिए शुल्क भी महज 19 रुपए देना होगा। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) नाम की इस नई सुविधा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई कि सेवाप्रदाता कंपनियों में कड़ी प्रतिस्पर्धा की वजह से यह हो सकता है कि उपभोक्ताओं को अपनी कंपनी बदलवाने के लिए आखिरकार कोई शुल्क न देना पड़े। अगर ये उम्मीदें साकार हो सकें तो निश्चित रूप से यह नई सुविधा भारत में टेलीकॉम सेवाओं के विकासक्रम में एक महत्वपूर्ण मुकाम साबित होगी। लेकिन यह ‘अगर’ बहुत बड़ा अगर है।

इस सेवा की अहमियत को समझने के बावजूद उपभोक्ताओं के मन में मौजूद यह संदेह बेजा नहीं है कि मोबाइल कंपनियां अपना एक ऐसा गिरोह बना सकती हैं, जिससे एक आम उपभोक्ता के लिए पुराना नंबर रखते हुए सेवाप्रदाता कंपनी को बदल लेना बेहद कठिन हो जाए। उद्योग और सेवा क्षेत्र के कई हलकों में ऐसे गुट पहले सामने आए हैं और उन्होंने प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं के फायदों की उम्मीदों को नाकाम कर दिया है।

इसीलिए यह जरूरी है कि सरकार ने एमएनपी सेवा की शुरुआत जिस जोर-शोर से की है, उसे उतनी ही गंभीरता से निगरानी और शिकायत निवारण के उपाय भी करने चाहिए। भारत की मोबाइल क्रांति दुनिया में बहुचर्चित है। अब जबकि इस मोबाइल क्रांति ने एक नया मुकाम हासिल किया है, तो इसके उद्देश्यों को सफल बनाने की जिम्मेदारी सरकार पर है।

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