आज देश 62वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू किए जाने के बाद भारत पूर्ण गणतंत्र बना था। इसी मौके की याद में आज पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर राजपथ पर देश की आन, बान और शान का प्रदर्शन किया गया। राजपथ पर तीनों सेनाओं ने परेड में हिस्सा लेकर अपनी ताकत और क्षमता का जोरदार प्रदर्शन किया। मेजर जनरल मानवेंद्र सिंह की अगुवाई में सेना की परेड शुरू हुई। परेड के दौरान हल्के लड़ाकू विमान 'तेजस', स्वेदशी हेलीकॉप्टर 'ध्रुव', एयूवी 'वरुणास्त्र', सुखोई-३०, मुख्य लड़ाकू टैंक 'भीष्म' टी-९० टैंक का प्रदर्शन किया गया। साथ ही, परेड में भारतीय संस्कृति की झलक भी दिखी।
दुनिया भर में अपनी प्रहार क्षमता के लिए चर्चित टी-90 (भीष्म) टैंकों का दस्ता जैसे ही राजपथ से गुजरा धरती जैसे मानो हिलने सी लगी। पांच किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम इस अत्यंत शक्तिशाली टैंक को देखकर वहां मौजूद लोग रोमांचित हो उठे।
यह टैंक थर्मल इमेजिंग शक्ति की मदद से रात में भी चार किलोमीटर तक मार कर सकता है। 60 किलोमीटर की रफ्तार से चलने में सक्षम इस टी-90 भीष्म टैंक में परमाणु, जैविक और रासायनिक हमले से बचाव के उपकरण लगे हुए हैं। जल्द ही सेना के पास ऐसे १५०० टैंक होंगे।
भीष्म टैंकों की गड़गड़ाहट के बाद लोग पहली सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की लांचर प्रणाली से रूबरू हुए। सभी हालात में प्रभावी यह मिसाइल किसी भी प्लेटफॉर्म जैसे जमीन, समुद्र, समुद्र के अंदर से हवा में छोड़ी जा सकती है। यह क्रूज मिसाइल भारत और रूस ने मिलकर बनाई है।
इसके बाद 'विजयी भव' के उद्घोष के साथ दुश्मन सेना पर भारी गोलीबारी कर तबाही मचाने वाली मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर प्रणाली 'पिनीका' राजपथ से गुजरी।
इसके बाद परेड में शत्रु सेना पर लंबी दूरी तक नजर रखने में सक्षम टैक्टिनकल कंट्रोल रडार-रिपोर्टर का नंबर आया। 2003 में सेना में शामिल किए गए इस राडार से 40 हजार मीटर तक निगरानी की जा सकती है।
इससे पहले राष्ट्रपति ने तिरंगा फहराया और 21 तोपों की सलामी दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ने मेजर लैशराम ज्योतिन सिंह को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान ज्योतिन सिंह के भाई ने ग्रहण किया। ज्योतिन सिंह काबुल में अपनी तैनाती के दौरान रिहायशी इलाके में आतंकवादी हमले में उनसे जूझते हुए वीरगति को प्राप्त किया था। लैशराम ने अपनी जान पर खेलकर पांच लोगों को बचाया था। लैशराम सेना के पहले डॉक्टर हैं, जिन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है। अशोक चक्र शांति काल में सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है।
गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में जबर्दस्त सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। करीब 35,000 जवान दिल्ली के चप्पे-चप्पे की निगरानी कर रहे हैं, जिसमें अर्द्धसैनिक बल और एनएसजी के करीब 15,000 जवान शामिल हैं। यूएवी के जरिए आसमान से भी निगरानी की जा रही है।
बुधवार की सुबह करीब साढ़े नौ बजे सबसे पहले रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इंडिया गेट पर बने अमर जवान ज्योति पर जाकर वहां शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया। राजपथ के नजदीक बने सलामी मंच पर राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने राष्ट्रपति की अगवानी की। इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुशीलो युधोयोनो मौजूद हैं।
दुनिया भर में अपनी प्रहार क्षमता के लिए चर्चित टी-90 (भीष्म) टैंकों का दस्ता जैसे ही राजपथ से गुजरा धरती जैसे मानो हिलने सी लगी। पांच किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम इस अत्यंत शक्तिशाली टैंक को देखकर वहां मौजूद लोग रोमांचित हो उठे।
यह टैंक थर्मल इमेजिंग शक्ति की मदद से रात में भी चार किलोमीटर तक मार कर सकता है। 60 किलोमीटर की रफ्तार से चलने में सक्षम इस टी-90 भीष्म टैंक में परमाणु, जैविक और रासायनिक हमले से बचाव के उपकरण लगे हुए हैं। जल्द ही सेना के पास ऐसे १५०० टैंक होंगे।
भीष्म टैंकों की गड़गड़ाहट के बाद लोग पहली सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की लांचर प्रणाली से रूबरू हुए। सभी हालात में प्रभावी यह मिसाइल किसी भी प्लेटफॉर्म जैसे जमीन, समुद्र, समुद्र के अंदर से हवा में छोड़ी जा सकती है। यह क्रूज मिसाइल भारत और रूस ने मिलकर बनाई है।
इसके बाद 'विजयी भव' के उद्घोष के साथ दुश्मन सेना पर भारी गोलीबारी कर तबाही मचाने वाली मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर प्रणाली 'पिनीका' राजपथ से गुजरी।
इसके बाद परेड में शत्रु सेना पर लंबी दूरी तक नजर रखने में सक्षम टैक्टिनकल कंट्रोल रडार-रिपोर्टर का नंबर आया। 2003 में सेना में शामिल किए गए इस राडार से 40 हजार मीटर तक निगरानी की जा सकती है।
इससे पहले राष्ट्रपति ने तिरंगा फहराया और 21 तोपों की सलामी दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ने मेजर लैशराम ज्योतिन सिंह को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान ज्योतिन सिंह के भाई ने ग्रहण किया। ज्योतिन सिंह काबुल में अपनी तैनाती के दौरान रिहायशी इलाके में आतंकवादी हमले में उनसे जूझते हुए वीरगति को प्राप्त किया था। लैशराम ने अपनी जान पर खेलकर पांच लोगों को बचाया था। लैशराम सेना के पहले डॉक्टर हैं, जिन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है। अशोक चक्र शांति काल में सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है।
गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में जबर्दस्त सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। करीब 35,000 जवान दिल्ली के चप्पे-चप्पे की निगरानी कर रहे हैं, जिसमें अर्द्धसैनिक बल और एनएसजी के करीब 15,000 जवान शामिल हैं। यूएवी के जरिए आसमान से भी निगरानी की जा रही है।
बुधवार की सुबह करीब साढ़े नौ बजे सबसे पहले रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इंडिया गेट पर बने अमर जवान ज्योति पर जाकर वहां शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया। राजपथ के नजदीक बने सलामी मंच पर राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने राष्ट्रपति की अगवानी की। इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुशीलो युधोयोनो मौजूद हैं।
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